Pujari Ji

RAM NAVAMI

RAM NAVAMI

<p>रामनवमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है,<strong>&nbsp;रामनवमी</strong>&nbsp;का त्यौहार&nbsp;<a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9A%E0%A5%88%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0">चैत्र</a>&nbsp;मास के शुक्ल पक्ष की&nbsp;<a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%AE%E0%A5%80">नवमी</a>&nbsp;&nbsp;तिथि&nbsp;को मनाया जाता है जो मार्च – अप्रैल में आता है।&nbsp;<a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%82_%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE">हिंदू</a>&nbsp;धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान&nbsp;<a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE">श्री राम</a>&nbsp;जी का जन्म हुआ था।&nbsp;&nbsp;इसे विशेष रूप से&nbsp;<strong>अयोध्या,&nbsp;उत्तर भारत,&nbsp;दक्षिण भारत और नेपाल</strong>&nbsp;में धूमधाम से मनाया जाता है। रामनवमी के दिन का धार्मिक,&nbsp;आध्यात्मिक और सांस्कृतिक का बड़ा महत्व है |इस दिन भगवान श्रीराम की विधि-विधान से पूजा अर्चना की जाती है. मान्यता है इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पूजा करने से साधक के जीवन में सुख शांति बनी रहती है और जीवन में आने वाली सभी परेशानियों से मुक्ति भी मिलती है. आपको बता दें कि इस दिन मां दुर्गा के नौवें रूप यानी सिद्धिदात्री की भी उपासना की जाती है.&nbsp;</p><p><i>चैत्रे नवम्यां प्राक् पक्षे दिवा पुण्ये पुनर्वसौ ।</i></p><p><i>उदये गुरुगौरांश्चोः स्वोच्चस्थे ग्रहपञ्चके ॥</i></p><p><i>मेषं पूषणि सम्प्राप्ते लग्ने कर्कटकाह्वये ।</i></p><p><i>आविरसीत्सकलया कौसल्यायां परः पुमान् ॥</i>&nbsp;(निर्णयसिन्धु)</p><p><a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80_%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B8">गोस्वामी तुलसीदास</a>&nbsp;ने&nbsp;<a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B8">रामचरितमानस</a>&nbsp;बालकाण्ड में स्वयं लिखा है कि उन्होंने रामचरित मानस की रचना का आरम्भ&nbsp;<a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%85%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE">अयोध्यापुरी</a>&nbsp;में विक्रम सम्वत् १६३१ (१५७४ ईस्वी) के रामनवमी (मंगलवार) को किया था। गोस्वामी जी ने रामचरितमानस में श्रीराम के जन्म का वर्णन कुछ इस प्रकार किया है-</p><p><i>भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।</i></p><p><i>हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥</i></p><p><i>लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी।</i></p><p><i>भूषन वनमाला नयन बिसाला सोभासिन्धु खरारी॥</i></p><p><i>कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता।</i></p><p><i>माया गुन ग्यानातीत अमाना वेद पुरान भनंता॥</i></p><p><i>करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता।</i></p><p><i>सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रकट श्रीकंता॥</i></p><p>रामनवमी के त्यौहार का महत्व&nbsp;<a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%82_%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE">हिंदु</a>&nbsp;धर्म सभ्यता में महत्वपूर्ण रहा है। इस पर्व के साथ ही माँ&nbsp;<a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97%E0%A4%BE">दुर्गा</a>&nbsp;के नवरात्रों का समापन भी होता है। हिन्दू धर्म में रामनवमी के दिन&nbsp;<a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE">पूजा</a>&nbsp;अर्चना की जाती है। रामनवमी की पूजा में पहले देवताओं पर जल, रोली और लेपन चढ़ाया जाता है,&nbsp;इसके बाद मूर्तियों पर मुट्ठी भरके चावल चढ़ाये जाते हैं। पूजा के बाद आ‍रती की जाती है। कुछ लोग इस दिन व्रत भी रखते है यह पर्व भारत में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता अत: इस शुभ तिथि को भक्त लोग रामनवमी के रूप में मनाते हैं एवं पवित्र नदियों में स्नान करके पुण्य के भागीदार होते है।&nbsp;</p><h3>पंचांग के अनुसार,&nbsp;चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि&nbsp;05&nbsp;अप्रैल को शाम&nbsp;07:26&nbsp;मिनट पर शुरू होगी,&nbsp;जो अगले दिन यानी&nbsp;06&nbsp;अप्रैल को शाम&nbsp;07:22&nbsp;मिनट पर समाप्त हो जाएगी. हिन्दू धर्म में उदया तिथि खास मायने रखती है इसलिए राम नवमी का पर्व&nbsp;06&nbsp;अप्रैल को मनाया जाएगा.&nbsp;</h3><h3><strong>रामनवमी शुभ मुहूर्त&nbsp;2025 -&nbsp;</strong>&nbsp;रामनवमी की पूजा का शुभ समय&nbsp;06&nbsp;अप्रैल को सुबह&nbsp;11:08&nbsp;मिनट से लेकर दोपहर&nbsp;01:39 मिनट तक है.</h3><ul><li>&nbsp;वहीं,&nbsp;दोपहर&nbsp;12:24&nbsp;मिनट पर भी है. इन दोनों शुभ समय में साधक भगवान श्रीराम की पूजा कर सकते हैं.</li><li>इस समय राम रक्षा स्तोत्र का भी पाठ करना चाहिए&nbsp;</li></ul><h3><strong>राम नवमी पूजा विधि - &nbsp;</strong>इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और भगवान श्रीराम का ध्यान करके व्रत का संकल्प लीजिए.</h3><ul><li>इसके बाद पूजा घर में गंगाजल छिड़कर शुद्ध करें.</li><li>अब आप पूजा घर में चौकी रखें और&nbsp;उसपर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर भगवान राम की परिवार सहित प्रतिमा स्थापित करें.&nbsp;</li><li>अब आप इस समय भगवान राम का ध्यान कर उनका आह्वान करें.</li><li>इसके बाद पंचोपचार कर राम परिवार संग भक्त हनुमान&nbsp;की भी पूजा करिए.&nbsp;</li><li>अब आप राम स्त्रोत और राम चालीसा का पाठ करिए.</li><li>फिर अंत में आरती कर पूजा संपन्न करें.&nbsp;</li><li>&nbsp;</li></ul><h3><strong>राम रक्षा स्तोत्र :-&nbsp;</strong></h3><p>चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम् । एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ।&nbsp;1।</p><p>ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् । जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितं ।2।</p><p>सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम्। स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम् ।।3।।</p><p>रामरक्षां पठेत प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम्। शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ।।&nbsp;4।।</p><p>कौसल्येयो दृशो पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुति। घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ।।5।।</p><p>जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः। स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः ।।6।।</p><p>करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित। मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः ।।7।।</p><p>सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः। उरु रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृताः ।।8।।</p><p>जानुनी सेतुकृत पातु जंघे दशमुखांतकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामअखिलं वपुः ।।9।।</p><p>एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृति पठेत। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत् ।।10।।</p><p>पातालभूतल व्योम चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः ।।11।।</p><p>रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन। नरौ न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ।।12।।</p><p>जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ।।13।।</p><p>वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत। अव्याहताज्ञाः सर्वत्र लभते जयमंगलम् ।।14।।</p><p>आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः। तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः ।।15।।</p><p>आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम्। अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान स नः प्रभुः ।।16।।</p><p>तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ। पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ।।17।।</p><p>फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ। पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ।।18।।</p><p>शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम्। रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ ।।19।।</p><p>आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशा वक्ष याशुगनिषङ्गसङ्गिनौ। रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम ।।20।।</p><p>सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा। गच्छन् मनोरथान नश्च रामः पातु सलक्ष्मणः ।।21।।</p><p>रामो दाशरथी शूरो लक्ष्मणानुचरो बली। काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः ।।22।।</p><p>वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः। जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेयपराक्रमः।।23।।</p><p>इत्येतानि जपन नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः। अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः ।।24।।</p><p>रामं दुर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम। स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नरः ।।25।।</p><p>रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरं काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम।</p><p>राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथतनयं श्यामलं शांतमूर्तिं वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम।।26।।</p><p>रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे। रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ।।27।।</p><p>श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम। श्रीराम राम रणकर्कश राम राम। श्रीराम राम शरणं भव राम राम ।।28।।</p><p>श्रीराम चन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि श्रीराम चंद्रचरणौ वचसा गृणामि। श्रीराम चन्द्रचरणौ शिरसा नमामि श्रीराम चन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ।।29।।</p><p>माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः । सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालुर्नान्यं जाने नैव जाने न जाने ।।30।।</p><p>दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मज। पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ।।31।।</p><p>लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथं। कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये ।।32।।</p><p>मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्ये ।।33।।</p><p>कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम। आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम ।।34।।</p><p>आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्। लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ।।35।।</p><p>भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम्। तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम् ।।36।।</p><p>रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः।</p><p>रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोस्म्यहं रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धराः।।37।।</p><p>राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।38।</p><p><strong>श्री रामचंद्र स्तुति :-&nbsp;</strong></p><p><strong>श्री</strong> राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्।<br>नवकंज लोचन कंज मुखकर,&nbsp;कंज पद कन्जारुणम्।।<br><br>कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।<br>पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।<br><br>भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।<br>रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।<br><br>सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।<br>आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।<br><br>इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।<br>मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।<br><br>मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।<br>करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।<br><br>एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।<br>तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।<br><br><strong>दोहा-</strong>&nbsp;जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।<br>मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।</p><p>आइये हम इस त्यौहार को बढे उत्साह से मानते है |</p><p>&nbsp;</p><p>&nbsp;</p>

Call Now WhatsApp